वाशिंगटन | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी ताकत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि राष्ट्रपति अब स्वतंत्र संघीय एजेंसियों के प्रमुखों को अपनी इच्छा से पद से हटा सकते हैं। हालांकि, फेडरल रिजर्व यानी अमेरिकी केंद्रीय बैंक को इससे अलग रखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा:
चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने कहा कि राष्ट्रपति को अधिकारियों को हटाने से रोकने वाली व्यवस्था संविधान में तय शक्तियों के बंटवारे के खिलाफ है। अब ट्रंप को एजेंसी चीफ हटाने के लिए कोई ठोस कारण बताने की जरूरत नहीं होगी। पहले संघीय कानूनों के तहत कारण बताना जरूरी था।
91 साल पुराना फैसला पलटा:
सुप्रीम कोर्ट ने 1935 के Humphrey’s Executor v. United States फैसले को पलट दिया। उस फैसले में राष्ट्रपति के अधिकार सीमित किए गए थे ताकि स्वतंत्र एजेंसियां राजनीतिक दबाव से मुक्त काम कर सकें। 9 जजों की बेंच में 6 कंजर्वेटिव जजों के बहुमत से यह फैसला आया।
फेडरल रिजर्व अपवाद:
फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक फिलहाल पद पर बनी रहेंगी। ट्रंप ने उन पर मॉर्गेज फ्रॉड के आरोप लगाए हैं, मगर कुक ने इनकार किया है। वह कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं।
किन एजेंसियों पर असर:
यह फैसला FTC, नेशनल लेबर रिलेशंस बोर्ड, मेरिट सिस्टम्स प्रोटेक्शन बोर्ड और कंज्यूमर प्रोडक्ट सेफ्टी कमीशन पर भी लागू होगा। ट्रंप ने FTC की पूर्व सदस्य रेबेका स्लॉटर को बिना कारण निकाला था।
ट्रंप की प्रतिक्रिया:
डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘यह बहुत सम्मान की बात है। मौजूदा प्रेसिडेंट होने के नाते यह ऐतिहासिक और अभूतपूर्व फैसला मिला, जो प्रेसिडेंशियल शक्तियों के संबंध में अब तक दिए गए सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक है।
’स्रोत: US Supreme Court / Truth Social

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