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Gorakhpur Dog Shelter: गोरखपुर में बनेगा शहर का पहला डॉग शेल्टर, 25 हजार वर्ग फीट में 950 आवारा कुत्तों को मिलेगी छत

Gorakhpur Dog Shelter: गोरखपुर की सड़कों पर आवारा कुत्तों का डर अब धीरे-धीरे कम होने वाला है। नगर निगम ने शहर का पहला डॉग शेल्टर बनाने का काम शुरू कर दिया है। इसके लिए गुलरिहा क्षेत्र के अमवा में जगह तय कर ली गई है। करीब 25 हजार वर्ग फीट में बनने वाले इस शेल्टर में 900 से 950 आवारा कुत्तों को रखा जा सकेगा। यहां उनके रहने, खाने-पीने, इलाज और वैक्सीनेशन का पूरा इंतजाम होगा। शासन की मंजूरी मिलने के बाद नगर निगम ने इस काम को तेज कर दिया है।

Gorakhpur Dog Shelter: क्यों पड़ी इसकी जरूरत

गोरखपुर में आवारा कुत्तों की समस्या कोई नई बात नहीं है। रोज सुबह बाजार जाना हो, बच्चों को स्कूल छोड़ने जाना हो या रात में घर लौटना हो, हर जगह आवारा कुत्तों का सामना होता है। काटने की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं।

एक अनुमान के मुताबिक गोरखपुर शहर में इस वक्त 50 हजार से भी ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। इतने सारे कुत्तों को रखने के लिए करीब 14 लाख वर्ग फीट जगह की जरूरत होगी। लेकिन शुरुआत में नगर निगम ने दो जगहों पर डॉग शेल्टर बनाने का फैसला किया है। इनमें से एक गुलरिहा और दूसरा जंगल हकीम नंबर दो में बनेगा। फिलहाल गुलरिहा में काम पहले शुरू हो रहा है।

कहां बनेगा यह शेल्टर और कितनी होगी जगह

Gorakhpur Dog Shelter
Gorakhpur Dog Shelter

शेल्टर गुलरिहा के अमवा में एबीसी सेंटर के ठीक बगल में बनेगा। यहां नगर निगम की अपनी जमीन है। नगर निगम के निर्माण विभाग ने करीब 25 हजार वर्ग फीट का नक्शा तैयार कर लिया है।

नगर निगम के अवर अभियंता विवेकानंद ने बताया कि प्रारूप तैयार हो चुका है। जैसे ही अंतिम मंजूरी मिलेगी, निर्माण का काम शुरू कर दिया जाएगा। मुख्य अभियंता अमित शर्मा ने कहा कि डॉग शेल्टर के तय मानकों को ध्यान में रखते हुए ही इसे बनाया जाएगा।

हालांकि एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार 1000 कुत्तों के लिए 27 हजार वर्ग फीट जगह चाहिए होती है। यह शेल्टर उससे थोड़ा कम यानी 25 हजार वर्ग फीट में बन रहा है। लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इसमें 900 से 950 कुत्तों को आराम से रखा जा सकेगा।

शेल्टर में क्या-क्या मिलेगा कुत्तों को

यह शेल्टर सिर्फ कुत्तों को बंद रखने की जगह नहीं होगा। यहां उनके लिए पूरी सुविधाएं होंगी। कुत्तों के रहने के लिए अलग-अलग घेरे बनाए जाएंगे। रोज खाना-पानी देने की व्यवस्था होगी। बीमार कुत्तों के इलाज के लिए पशु चिकित्सक तैनात किए जाएंगे। सभी कुत्तों का वैक्सीनेशन होगा और डिवर्मिंग भी की जाएगी। आक्रामक और बीमार कुत्तों को अलग रखा जाएगा ताकि वे दूसरे कुत्तों और कर्मचारियों को नुकसान न पहुंचाएं।

हर महीने लाखों का होगा खर्च

इस शेल्टर को चलाना सस्ता नहीं होगा। एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के मानकों के अनुसार एक कुत्ते के खाने पर हर दिन 40 से 50 रुपये का खर्च आता है। इस हिसाब से 950 कुत्तों पर हर महीने खाने का खर्च ही करीब 14 से 15 लाख रुपये होगा।

इसके अलावा वैक्सीनेशन, डिवर्मिंग और दूसरे इलाज पर भी खर्च करना होगा। पशु चिकित्सकों और शेल्टर में काम करने वाले कर्मचारियों की तनख्वाह भी अलग से होगी।

अधिकारियों ने बताया कि शेल्टर के संचालन के लिए अलग से बजट बनाया जाएगा। पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों की तैनाती का प्रस्ताव भी तैयार हो रहा है।

शिकायत करने के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी

अगर आपके मोहल्ले में या घर के पास आवारा कुत्तों का आतंक है तो आप सीधे शिकायत कर सकते हैं। नगर निगम और एबीसी सेंटर दोनों ने इसके लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।

नगर निगम का हेल्पलाइन नंबर 8810709390 है। एबीसी सेंटर का नंबर 8810709376 है। शिकायत मिलने के बाद टीम मौके पर पहुंचकर जरूरी कदम उठाएगी।

शहरवासियों को क्या मिलेगा फायदा

गोरखपुर के लोग लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे हैं। बच्चे स्कूल जाते डरते हैं, बुजुर्ग सुबह की सैर करते हुए घबराते हैं और रात में घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।

डॉग शेल्टर बनने के बाद सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्ते हटाए जाएंगे। इससे आम लोगों को काफी राहत मिलेगी। स्कूलों और मंदिरों के पास कुत्तों का डर कम होगा। रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर आने-जाने वाले यात्री भी चैन की सांस ले सकेंगे।

छोटी शुरुआत, लेकिन उम्मीद बड़ी

यह जरूर है कि 50 हजार से ज्यादा आवारा कुत्तों के मुकाबले 950 की क्षमता वाला यह शेल्टर बहुत छोटा है। लेकिन किसी भी बड़े काम की शुरुआत पहले एक छोटे कदम से ही होती है।

नगर निगम की यह पहल सही दिशा में एक जरूरी कदम है। अगर यह शेल्टर सही तरीके से चला और दूसरे शेल्टर भी जल्दी बन गए तो गोरखपुर की सड़कें धीरे-धीरे ज्यादा सुरक्षित होती जाएंगी। शहर के लोगों को उम्मीद है कि यह काम जल्दी पूरा होगा और उन्हें इस रोज की परेशानी से राहत मिलेगी।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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