Jakarta| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में इस्ताना मेरदेका में राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक चली बातचीत में व्यापार, निवेश, रक्षा, कृषि, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में भारत-इंडोनेशिया संबंधों ने नई गति और अधिक गहराई हासिल की है। आज की बातचीत में हमने दोनों देशों के लोगों के हित में सहयोग को और आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

”बैठक के मुख्य बिंदु
1. व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा
दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 30 अरब डॉलर से बढ़ाकर अगले 5 वर्षों में 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा। चर्चा में फार्मा, ऑटोमोबाइल, डिजिटल टेक्नोलॉजी, नवीकरणीय ऊर्जा और खनन क्षेत्र में निवेश के अवसरों पर फोकस रहा। प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया के उद्योगपतियों से भारत में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘PLI स्कीम’ के तहत निवेश का आह्वान किया। राष्ट्रपति प्राबोवो ने भी भारत को इंडोनेशिया के ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।
2. कृषि, खाद्य सुरक्षा और मत्स्य पालन
दोनों देश कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था हैं। बैठक में जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने के लिए जलवायु-स्मार्ट कृषि, बीज विकास, खाद्य प्रसंस्करण और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर बात हुई। इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा पाम ऑयल उत्पादक है, जबकि भारत चावल, गेहूं और दालों का बड़ा उत्पादक है। दोनों ने खाद्यान्न की आपूर्ति स्थिर रखने और महंगाई पर नियंत्रण के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके अलावा समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग और मत्स्य पालन में तकनीकी सहयोग पर भी चर्चा हुई।
3. स्वास्थ्य और मानव विकास
कोविड महामारी के बाद स्वास्थ्य सहयोग को प्राथमिकता दी गई। भारत ने इंडोनेशिया को जेनेरिक दवाएं, टीके और डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में सहयोग का प्रस्ताव दिया। दोनों नेताओं ने आयुष, पारंपरिक चिकित्सा और मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने पर भी सहमति जताई। मानव विकास के तहत कौशल विकास, शिक्षा और छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रमों को तेज करने का फैसला लिया गया।
4. रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के दो प्रमुख समुद्री देश होने के नाते रक्षा और समुद्री सुरक्षा बैठक का अहम हिस्सा रही। दोनों नेताओं ने नौसेना अभ्यास, समुद्री डोमेन अवेयरनेस, समुद्री लुटेरों से निपटने और हिंद महासागर में शांति बनाए रखने पर सहमति जताई। भारत ने इंडोनेशिया को रक्षा उपकरणों के निर्यात और संयुक्त सैन्य अभ्यास बढ़ाने का प्रस्ताव दिया। साथ ही आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और कट्टरपंथ से निपटने के लिए खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान पर भी सहमति बनी।
5. कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक संबंध
भारत और इंडोनेशिया के बीच 2000 साल पुराने सांस्कृतिक संबंध हैं। दोनों ने बौद्ध और हिंदू विरासत को बढ़ावा देने, पर्यटन और सीधी उड़ानों को बढ़ाने पर चर्चा की। डिजिटल कनेक्टिविटी के तहत UPI और डिजिटल भुगतान प्रणाली को आपस में जोड़ने की संभावनाओं पर भी बात हुई।
इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक
महत्वप्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया दोनों ही इंडो-पैसिफिक विजन में विश्वास रखते हैं, जो खुले, समावेशी और नियम-आधारित व्यवस्था पर आधारित है। दोनों देश आसियान और G20 जैसे मंचों पर भी साथ काम करते हैं। राष्ट्रपति प्राबोवो ने कहा कि इंडोनेशिया भारत को अपना ‘सच्चा साझेदार’ मानता है और दोनों देश मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान दे सकते हैं।

पृष्ठभूमि: भारत-इंडोनेशिया संबंध
भारत और इंडोनेशिया के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत जुड़ाव पर आधारित हैं। 1950 में दोनों देशों ने राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। 2018 में संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा दिया गया। व्यापार के अलावा दोनों देश आतंकवाद विरोध, आपदा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भी सहयोग कर रहे हैं।
इंडोनेशिया आसियान का सबसे बड़ा देश है और भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का केंद्र है। भारत इंडोनेशिया को सागरमाला और समुद्री सुरक्षा में अहम भागीदार मानता है। वहीं इंडोनेशिया भारत को तकनीक, फार्मा और डिजिटल क्षेत्र में सहयोगी के रूप में देखता है।

आगे की राह
बैठक में तय हुआ कि दोनों देशों के विदेश मंत्रियों और संबंधित विभागों के बीच नियमित संवाद होगा। अगले 6 महीने में व्यापार, रक्षा और कृषि पर संयुक्त कार्यसमूह की बैठकें होंगी। राष्ट्रपति प्राबोवो ने प्रधानमंत्री को इंडोनेशिया आने का निमंत्रण भी दिया, जिसे प्रधानमंत्री ने स्वीकार कर लिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक ऐसे समय हुई है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और भू-राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं। ऐसे में भारत-इंडोनेशिया सहयोग न सिर्फ दोनों देशों बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए स्थिरता का आधार बन सकता है।
नेताओं के बयान
PM मोदी: “हम दोनों लोकतांत्रिक देश हैं। हमारे संबंध जनता-जनता के जुड़ाव पर आधारित हैं। व्यापार, रक्षा और विकास में हमारी साझेदारी आने वाले समय में और मजबूत होगी।”राष्ट्रपति प्राबोवो: “भारत हमारे लिए महत्वपूर्ण साझेदार है। हम खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा और तकनीक में भारत के अनुभव से सीखना चाहते हैं।
निष्कर्ष
जकार्ता में हुई यह बैठक भारत-इंडोनेशिया संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत है। व्यापार से लेकर रक्षा और सांस्कृतिक सहयोग तक, दोनों देशों ने भविष्य के रोडमैप पर सहमति जताई है। इंडो-पैसिफिक में शांति, समृद्धि और स्थिरता के लिए यह साझेदारी आने वाले वर्षों में और अहम भूमिका निभाएगी।
स्रोत: PMO India, इंडोनेशिया राष्ट्रपति कार्यालय, विदेश मंत्रालय



