Shimla: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने रामपाल के 13 अनुयायियों को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी।
इन सभी पर आरोप है कि ये हिंदू देवी-देवताओं और संतों के बारे में रामपाल की आपत्तिजनक सामग्री वाली किताबें बांट रहे थे।
कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस राकेश कैंथला की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले मामलों में प्रथमदृष्टया अपराध बनता है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के तहत मिलने वाली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार असीमित नहीं है। यह अधिकार लोक व्यवस्था के दायरे में आता है।
नालागढ़ कोर्ट की कार्यवाही रद्द
हालांकि कोर्ट ने सोलन जिले की नालागढ़ अदालत में इनके खिलाफ चल रही कार्यवाही को रद्द कर दिया।
इसका कारण यह बताया गया कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण काम करने की धाराओं के तहत मुकदमा चलाने के लिए सक्षम अधिकारी से मंजूरी नहीं ली गई थी।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अपराध का संज्ञान लेना अधिकार क्षेत्र से बाहर था।
अभियोजन पक्ष अब सक्षम अधिकारी से मंजूरी मिलने के बाद नई कार्यवाही शुरू करने के लिए स्वतंत्र होगा। कोर्ट ने कहा कि यदि कानून के तहत ऐसा करना जायज हो, तो मंजूरी मिलने के बाद राज्य को नई कार्यवाही शुरू करने से यह आदेश नहीं रोकेगा।


