PM Modi On Paper Leak: संसद भवन के लाइब्रेरी बिल्डिंग स्थित जीएमसी बालयोगी ऑडिटोरियम में मंगलवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के संसदीय दल की विशेष ‘मंगल मिलन’ बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके लंबे राजनीतिक कार्यकाल और हालिया उपलब्धियों के लिए सम्मानित करना तथा उच्च सदन यानी राज्यसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों का स्वागत करना था।
समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं से जुड़े सबसे संवेदनशील विषय यानी पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार का कड़ा रुख स्पष्ट किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें कानून के तहत सबसे कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
PM Modi On Paper Leak: युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
प्रधानमंत्री ने एनडीए सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि हाल ही में सामने आए पेपर लीक के मामलों को सरकार ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। प्रशासन ने इस दिशा में त्वरित और प्रभावी कदम उठाए हैं ताकि दोषियों तक कानून की पहुंच जल्द से जल्द सुनिश्चित हो सके। देश की युवा शक्ति को भरोसा दिलाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
परीक्षा तंत्र में पारदर्शिता लाने पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि व्यवस्था को और अधिक फूल-प्रूफ बनाया जा रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति पूरी तरह से रोकी जा सके। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से भी आह्वान किया कि इस तरह के संवेदनशील और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार की राजनीति करने से बचा जाना चाहिए। देशहित में सभी को मिलकर एक साझा और मजबूत समाधान की दिशा में काम करना होगा।
केंद्रीय मंत्रियों और दिग्गजों की मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, किरेन रिजिजू और अर्जुन राम मेघवाल पहुंचे। इनसे पहले गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, जी. किशन रेड्डी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सहित कई वरिष्ठ नेता सभागार पहुंच चुके थे।
बैठक के दौरान एनडीए के तमाम घटक दलों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने की ऐतिहासिक उपलब्धि पर एक बधाई प्रस्ताव भी पारित किया गया। इस प्रस्ताव के माध्यम से गठबंधन के सभी साथियों ने उनके नेतृत्व के प्रति निष्ठा और विश्वास दोहराया।
नए सांसदों में दिखा भारी उत्साह
संसदीय दल की इस बैठक में पहली बार भाग ले रहे नवनिर्वाचित सांसदों में खासा उत्साह देखा गया। बैठक से पहले मीडिया से बातचीत करते हुए भाजपा सांसद अशोक मित्तल ने अपनी भावनाएं साझा कीं। उन्होंने कहा कि एनडीए और भाजपा की इस संयुक्त संसदीय बैठक का हिस्सा बनना उनके लिए एक बेहद सुखद अनुभव है।
उन्होंने कहा कि देश के शीर्ष नेतृत्व को करीब से सुनना और राष्ट्र निर्माण की दिशा में उनके विचारों को समझना उनके राजनीतिक जीवन की एक नई शुरुआत है। मित्तल ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष का मार्गदर्शन उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र और देश के विकास में सही दिशा में काम करने की ऊर्जा देगा।
एनसीपीआई की अनुपस्थिति रही चर्चा का केंद्र
एक तरफ जहां एनडीए इस बैठक के जरिए अपनी एकजुटता का शक्ति प्रदर्शन कर रहा था, वहीं नवगठित ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ यानी एनसीपीआई इस आयोजन से दूर रही। इस नए राजनीतिक दल में तृणमूल कांग्रेस के वे 20 बागी सांसद शामिल हैं जिन्होंने हाल ही में एनडीए को अपना समर्थन देने का फैसला किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह गुट इस संयुक्त बैठक में इसलिए शामिल नहीं हो सका क्योंकि लोकसभा अध्यक्ष द्वारा अभी तक एनसीपीआई के बैनर तले इस समूह के विलय को औपचारिक मान्यता प्रदान नहीं की गई है।
PM Modi On Paper Leak: सुदीप बंद्योपाध्याय का बयान और स्थानीय मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट
इससे पहले रविवार को एनसीपीआई ने अपनी पहली स्वतंत्र संसदीय दल की बैठक आयोजित की थी। इस बैठक के बाद समूह के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने मीडिया से बात करते हुए अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने बताया था कि सदन के भीतर उनके समूह के बैठने की व्यवस्था, डिवीजन नंबर और एक अलग विधायी ब्लॉक को स्वीकार कर लिया गया है।
बंद्योपाध्याय ने कहा था कि उनकी पार्टी ने एनडीए सरकार को समर्थन देने का निर्णय लिया है और सदन की बहसों तथा विधायी कार्यों में उनकी पूरी सहभागिता होगी। उन्होंने यह भी जोर दिया कि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलनी चाहिए। पश्चिम बंगाल से जुड़े स्थानीय मुद्दों पर बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी सांसद को अपने राज्य या निर्वाचन क्षेत्र से जुड़ी कोई प्रशासनिक कठिनाई आती है, तो उस विषय को सीधे राज्य की मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया जाना चाहिए। ऐसे स्थानीय मसलों को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के मंच पर नहीं लाया जाना चाहिए, ताकि संसद के कामकाज की गरिमा और गति बनी रहे।
एनडीए की इस मंगल मिलन बैठक ने एक तरफ जहां आगामी विधायी सत्र के लिए सत्ता पक्ष के एजेंडे को धार दी है, वहीं राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों और पेपर लीक जैसे गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार की आक्रामक नीति के संकेत भी स्पष्ट कर दिए हैं।
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