CJP Protest: राजधानी दिल्ली के सियासी गलियारों और विरोध प्रदर्शन स्थलों पर इन दिनों सरगर्मी काफी बढ़ गई है। नीट पेपर लीक विवाद को लेकर लगातार मुखर नजर आ रही कॉकरोच जनता पार्टी ने अब अपनी मुहिम को डिजिटल आयाम दे दिया है। संगठन ने एक खास पोर्टल की शुरुआत की है, जिसके माध्यम से आम लोगों और आंदोलनकारियों को बड़ी राहत या मदद मिलने की बात कही जा रही है।
इस नई वेबसाइट के जरिए संगठन ने सीधे तौर पर यह अपील जारी की है कि यदि किसी भी नागरिक या प्रदर्शनकारी के पास खाकी वर्दीधारियों द्वारा की गई ज्यादतियों, मारपीट या दुर्व्यवहार के डिजिटल सबूत मौजूद हैं, तो वे उन्हें बिना किसी झिझक के इस पोर्टल पर साझा कर सकते हैं। सीजेपी का साफ कहना है कि इन तमाम वीडियो और तस्वीरों को आधार बनाकर उन पुलिसकर्मियों की पहचान की जाएगी जिन्होंने कथित तौर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ अनुचित व्यवहार किया है।
CJP Protest: स्वास्थ्य समस्याओं और तनातनी के बीच आंदोलन जारी
दूसरी तरफ, इस तीखे संघर्ष के बीच आंदोलन की अगुवाई कर रहे चेहरों की सेहत को लेकर भी चिंताएं सामने आने लगी हैं। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके की तबियत अचानक काफी बिगड़ गई थी। जब उनकी चिकित्सीय जांच कराई गई, तब रिपोर्ट में उनके टाइफॉयड से पीड़ित होने की बात सामने आई। खुद अभिजीत ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक वीडियो संदेश जारी कर अपने स्वास्थ्य के बारे में समर्थकों को आधिकारिक जानकारी दी।
इसके अलावा, पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन से जुड़े पुराने घटनाक्रम भी अब परत दर परत बाहर आ रहे हैं। इक्कीस जुलाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है। इस फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह सफदरजंग अस्पताल परिसर में सोनम वांगचुक को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल जाने से रोके जाने का प्रयास किया गया। हालांकि दिल्ली उच्च न्यायालय की तरफ से उन्हें बेहतर इलाज के लिए मेदांता जाने की अनुमति मिल चुकी थी, फिर भी अस्पताल प्रशासन और वहां तैनात सुरक्षा बलों ने उन्हें बाहर निकलने से रोकने की हरसंभव कोशिश की। हालांकि इस वायरल वीडियो पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सरकार के साथ आज होगी तीसरे दौर की अहम बैठक
बातचीत के मोर्चे पर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने मीडिया से बातचीत में खुलासा किया कि सरकार के नुमाइंदों के साथ आज शाम साढ़े तीन से चार बजे के बीच एक और दौर की बैठक तय की गई है, हालांकि अभी तक बैठक स्थल को अंतिम रूप नहीं दिया गया है।
आशुतोष रांका का कहना है कि जिन दो प्रमुख मांगों पर पिछली बैठकों में सहमति बन चुकी है, संगठन अब उन पर केवल मौखिक बातों से काम नहीं चलाएगा, बल्कि सरकार से ठोस और लिखित आश्वासन की मांग करेगा। इसके साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे पर संगठन पूरी तरह अड़ गया है। सरकार के सामने इस मांग पर ‘हां’ या ‘ना’ में स्पष्ट जवाब देने की बात रखी गई है।
दूसरी तरफ, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद द्वारा सोनम वांगचुक को लेकर दिए गए बयानों पर भी संगठन ने कड़ी आपत्ति जताई है। प्रवक्ता ने मसूद की टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के समय में किसी की नीयत या संघर्ष पर सवाल उठाना बिल्कुल भी उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले भी कई बार कानूनी राहत और मुआवजे जैसे मुद्दों पर समझौते होते रहे हैं, इसलिए इस तरह की बयानबाजी से बचना चाहिए।
CJP Protest: विपक्षी नेताओं का समर्थन और एनटीए की बड़ी कार्रवाई
इस पूरे घटनाक्रम के बीच तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ सांसद महुआ मोइत्रा भी खुलकर छात्रों और प्रदर्शनकारियों के समर्थन में उतर आई हैं। उन्होंने नीट विरोध प्रदर्शन की तारीफ करते हुए कहा कि इस जुझारू तेवर ने आखिरकार सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया है। महुआ मोइत्रा ने मुख्यधारा के मीडिया पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इस आंदोलन को शुरू से ही दबाने और बदनाम करने की कोशिश की गई। उन्होंने भी अपनी मांग दोहराते हुए साफ कर दिया कि जब तक शिक्षा मंत्री पद नहीं छोड़ते, तब तक बातचीत का कोई सार्थक नतीजा नहीं निकल सकता।
एक तरफ जहां जंतर-मंतर के आसपास कड़ा पहरा बैठाया गया है और सत्रह मेट्रो स्टेशनों के शटर गिरा दिए गए हैं, वहीं दूसरी तरफ नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए ने भी पेपर लीक के इस गंभीर विवाद के बीच बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस पूरे मामले की गाज एजेंसी के भीतर भी गिरी है और कुल सैंतालीस अधिकारियों को उनकी नौकरियों से बर्खास्त कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। व्यवस्था के भीतर पारदर्शिता लाने और जनता का भरोसा फिर से बहाल करने के लिए इस प्रशासनिक सफाई को एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
CJP Protest: प्रशासन की सख्ती और भविष्य की राह
सरकार की तरफ से हालांकि अब तक सीजेपी की मुख्य मांगों पर कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से इस पूरे मामले की निष्पक्ष सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें गठित करने का बड़ा ऐलान जरूर किया जा चुका है। अभिजीत दीपके ने सरकार से तीखे सवाल पूछते हुए कहा है कि आखिर इतनी गड़बड़ियों के बाद भी केंद्रीय मंत्री को क्यों बचाया जा रहा है, जबकि छात्र और युवा केवल अपनी जायज आवाज उठा रहे हैं।
जंतर-मंतर के चारों तरफ भारी बैरिकेडिंग और पुलिस छावनी में तब्दील हुए इलाके के बीच अब सबकी निगाहें आज होने वाली उस तीसरी बैठक पर टिकी हैं, जो इस गतिरोध को खत्म करने की दिशा में एक नया मोड़ दे सकती है। प्रदर्शनकारी अपनी जिद पर अड़े हैं और प्रशासन अपनी सीमाओं के भीतर व्यवस्था संभालने में जुटा हुआ है। आने वाले कुछ घंटे यह तय करने के लिए बेहद अहम होंगे कि इस सियासी और सामाजिक रस्साकशी का आखिरकार क्या परिणाम निकलता है।
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