Top 5 This Week

Related Posts

Indian Healthcare: इलाज के लिए दुनिया की पहली पसंद बन रहा भारत! विदेशी मरीजों की संख्या 16 साल में 4.5 गुना बढ़ी

Indian Healthcare: दुनियाभर के स्वास्थ्य मानचित्र पर भारत की धमक अब और ज्यादा मजबूत हो गई है। पश्चिमी देशों में लंबी प्रतीक्षा सूचियों और महंगे होते इलाज से त्रस्त विदेशी नागरिकों के लिए भारत आज के समय में उम्मीद की सबसे बड़ी किरण बनकर उभर रहा है। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो सोलह वर्षों का सफर इस बात की गवाही देता है कि किस प्रकार देश ने वैश्विक स्वास्थ्य पर्यटन के नक्शे पर अपनी गहरी छाप छोड़ी है।

वर्ष 2009 के दौरान जब महज एक लाख बारह हजार विदेशी नागरिक चिकित्सा सेवाओं का लाभ उठाने के लिए भारतीय सरजमीं पर पहुंचे थे, तब किसी ने शायद यह नहीं सोचा था कि यह आंकड़ा इतनी तेज रफ्तार से छलांग लगाएगा। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में यह संख्या बढ़कर पांच लाख सात हजार के आंकड़े को पार कर गई है। सोलह वर्षों के इस अंतराल में विदेशी मरीजों की आमद में करीब साढ़े चार गुना की ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

Indian Healthcare: कहां से आ रहे हैं सबसे ज्यादा मरीज और क्या है बाजार का अनुमान?

भारत आने वाले इन मेडिकल टूरिस्टों की फेरिस्ट काफी लंबी है, जिसमें पड़ोसी देशों से लेकर खाड़ी और अफ्रीकी महाद्वीप तक के नाम शामिल हैं। मुख्य तौर पर बांग्लादेश, इराक, उज्बेकिस्तान, सोमालिया, ओमान और केन्या से बड़ी संख्या में लोग अपने बेहतर इलाज के लिए भारतीय अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। इस बढ़ते रुझान का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य उद्योग पर पड़ रहा है।

वर्ष 2025 में भारतीय मेडिकल टूरिज्म का कुल बाजार चौरासी हजार करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच चुका था। उद्योग जगत के जानकारों और आर्थिक विश्लेषकों का अनुमान है कि यह रफ्तार यहीं थमने वाली नहीं है। आने वाले कुछ ही वर्षों यानी सन 2030 तक यह बाजार बढ़कर एक लाख छप्पन हजार करोड़ रुपए यानी करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए के विशाल मुकाम को छू लेगा।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और कम खर्च बन रहा बड़ी वजह

विदेशों में बैठे मरीजों को भारत की ओर खींचने वाली सबसे बड़ी ताकत यहां के कुशल विशेषज्ञ डॉक्टर हैं। पश्चिमी देशों में जहां सामान्य परामर्श या छोटी-मोटी सर्जरी के लिए भी महीनों और कभी-कभी साल भर का लंबा इंतजार करना पड़ता है, वहीं भारत में यह प्रक्रिया बेहद सुगम है। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों का मिलना और उनसे तुरंत परामर्श लेना विदेशी नागरिकों को सबसे ज्यादा आकर्षित कर रहा है। इसके अलावा जांच रिपोर्टों का तुरंत हाथ में आ जाना और इलाज के कुल खर्च का पहले से पारदर्शी तरीके से तय होना मरीजों का भरोसा जीत रहा है। खर्च के मामले में भारत का कोई मुकाबला नहीं है। अमेरिका में जिस चिकित्सा प्रक्रिया पर पंद्रह हजार रुपए तक का भारी खर्च आता है, वही काम भारत के भीतर महज एक से दो हजार रुपए में संभव हो जाता है।

एक अन्य मिसाल देते हुए डॉक्टर कहते हैं कि नीदरलैंड्स में दांतों के साधारण उपचार पर सोलह हजार रुपए अधिक चुकाने पड़ते हैं, जबकि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वही इलाज केवल तीन हजार रुपए में सफलताપूर्वक पूरा हो जाता है। ब्रिटिश नागरिक एंडरसन का वाकया इसका जीता-जागता उदाहरण है, जिन्हें अपने देश में न्यूरो संबंधी परामर्श के लिए एक साल से अधिक का इंतजार करना पड़ रहा था, लेकिन भारत आते ही उन्हें अगले ही दिन अपॉइंटमेंट मिल गया, एमआरआई और ब्लड टेस्ट फौरन हुए और घंटे भर के भीतर रिपोर्ट हाथ में आ गई।

देश का मजबूत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और अस्पतालों का नेटवर्क

इतनी बड़ी संख्या में आ रहे विदेशी नागरिकों को संभालने के लिए भारत के पास चिकित्सा बुनियादी ढांचे का एक विशाल नेटवर्क मौजूद है। पूरे देश में कुल 69,364 अस्पताल इस समय सेवा दे रहे हैं। इनमें से करीब छियालीस प्रतिशत यानी 43,486 निजी अस्पताल हैं, जबकि 25,778 सरकारी अस्पताल अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। देश भर में बारह लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड डॉक्टर अपनी चिकित्सकीय सेवाएं दे रहे हैं। गुणवत्ता के मोर्चे पर भी भारतीय अस्पताल पीछे नहीं हैं, क्योंकि देश में कुल 1,299 अस्पतालों को राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड यानी एनएबीएच की आधिकारिक मान्यता प्राप्त है।

इस मजबूत निजी और सार्वजनिक नेटवर्क के बूते ही भारत विदेशी मरीजों के भारी दबाव को आसानी से संभाल पा रहा है। यही वजह है कि अब वे मरीज भी तुर्किए और थाईलैंड जैसे पारंपरिक विकल्पों को छोड़कर भारत का रुख कर रहे हैं, जो पहले मध्य एशियाई देशों में इलाज कराने जाते थे। डिजिटल माध्यमों की पहुंच ने इसमें उत्प्रेरक का काम किया है, जिससे मरीज घर बैठे ही देश के अस्पतालों, डॉक्टरों और इलाज की पूरी प्रक्रिया की जानकारी जुटा लेते हैं।

Indian Healthcare: ई-वीजा की सुविधा और पारंपरिक चिकित्सा का बढ़ता दायरा

विदेशी मरीजों के लिए भारत की यात्रा को पूरी तरह कागजी झंझटों से मुक्त बनाने के लिए सरकार ने भी कई बड़े कदम उठाए हैं। वर्तमान में दुनिया भर के 172 देशों के नागरिकों को भारत सरकार की ओर से ई-मेडिकल वीजा की सुविधा दी जा रही है। इसके साथ ही मरीजों की देखभाल के लिए साथ आने वाले परिजनों या सहायकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ई-मेडिकल अटेंडेंट वीजा का विकल्प भी उपलब्ध कराया गया है।

इतना ही नहीं, जो विदेशी नागरिक आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ भारत की प्राचीन पद्धतियों जैसे आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी के जरिए उपचार पाना चाहते हैं, उनके लिए विशेष रूप से ई-आयुष वीजा की अलग श्रेणियां भी शुरू की गई हैं। इन तमाम सेवाओं को एक छत के नीचे लाने के लिए ‘हील इन इंडिया’ पोर्टल को एक व्यापक साझा मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है।

Indian Healthcare: डेंगू के खिलाफ जंग में बड़ी कामयाबी, क्यूडेंगा वैक्सीन को मंजूरी

चिकित्सा जगत से जुड़ी एक अन्य बड़ी खबर के तहत देश में स्वास्थ्य के मोर्चे पर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। जापान की प्रमुख वैश्विक बायोफार्मास्युटिकल कंपनी ताकेदा द्वारा विकसित देश की पहली डेंगू वैक्सीन ‘क्यूडेंगा’ को भारत में बाजार में इस्तेमाल की औपचारिक अनुमति मिल गई है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया यानी डीसीजीआई ने इस बहुप्रतीक्षित टीके को हरी झंडी दिखा दी है।

इस वैक्सीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि चार साल से लेकर साठ साल तक के लोग बिना किसी पूर्व रक्त जांच के इस टीके की खुराक ले सकेंगे। आने वाले समय में इस वैक्सीन का निर्माण देश के भीतर ही किए जाने की योजना है, जिससे डेंगू जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ चल रही जंग को एक नया और मजबूत हथियार मिल सकेगा।

Read More Here:- 

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles