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Delhi Protest: नीट परीक्षा विवाद और जंतर-मंतर प्रदर्शन, दिल्ली से पटना तक सियासी उबाल, शाह के घर अहम बैठक

Delhi Protest: राजधानी दिल्ली की सड़कों से लेकर संसद भवन के गलियारों तक इन दिनों सियासी पारा अपने चरम पर है। नीट परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर शुरू हुआ छात्रों का यह आंदोलन अब विकराल रूप ले चुका है। विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई भिड़ंत के बाद हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि देश के कई हिस्सों में इसका असर साफ दिखाई देने लगा है। इस बीच, राजनीतिक दलों की सक्रियता और प्रशासन की सख्ती ने इस पूरे घटनाक्रम को एक राष्ट्रीय बहस का केंद्र बना दिया है।

Delhi Protest: संसद से सड़क तक गूंजा हंगामा, विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन

बुधवार की सुबह संसद परिसर का नजारा बदला हुआ था। विपक्षी दलों के तमाम सांसद काले कपड़े पहनकर सदन पहुंचे और मकर द्वार के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। उनकी मांग है कि नीट परीक्षा में हुई कथित धांधलियों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें। संसद के मानसून सत्र के दौरान इस मुद्दे को लेकर दोनों सदनों में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कक्ष में हुई विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक में यह रणनीति बनाई गई कि सरकार को इस मामले पर घेरा जाए। लोकसभा और राज्यसभा में स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष अड़ा रहा। हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही को पहले दोपहर बारह बजे तक और बाद में दो बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। सरकार की ओर से मंत्रियों ने साफ किया कि वे सदन में हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष के अड़ियल रुख के कारण गतिरोध बरकरार है।

राहुल गांधी की हिरासत और राजनीतिक सरगर्मी

बीते मंगलवार का दिन राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से बेहद उथल-पुथल भरा रहा। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई बड़े नेता प्रदर्शनकारियों के समर्थन में प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करने निकले थे। सुरक्षा प्रोटोकॉल और निषेधाज्ञा के बीच पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया। इसके बाद हुए धरने के दौरान दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी समेत कई दिग्गज नेताओं को हिरासत में ले लिया और उन्हें छत्रसाल स्टेडियम ले जाया गया।

कांग्रेस ने इस कार्रवाई को तानाशाही करार देते हुए सरकार पर तीखे हमले किए। पार्टी का आरोप है कि छात्रों की जायज आवाज को दबाने के लिए पुलिस बल का बेजा इस्तेमाल किया जा रहा है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कांग्रेस पर छात्रों के कंधे पर रखकर राजनीतिक रोटियां सेकने का आरोप लगाया। केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा नेताओं ने दो टूक कहा कि विपक्ष शिक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे का इस्तेमाल केवल अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए कर रहा है।

Delhi Protest: गृह मंत्री के आवास पर मैराथन बैठक और प्रशासनिक चौकसी

बढ़ते तनाव और देश भर में फैलते विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए सरकार ने सुरक्षा और कूटनीतिक मोर्चे पर हलचल तेज कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सरकारी आवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई, जिसमें पार्टी और सरकार के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इस बैठक में मौजूदा हालात से निपटने और संसद में रणनीति तय करने पर गहन मंथन किया गया।

सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए दिल्ली में विशेष इंतजाम किए गए हैं। पश्चिम बंगाल से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की बीस अतिरिक्त कंपनियों को राजधानी में बुलाया गया है, जिन्हें संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है। इसके अलावा, सुरक्षा कारणों के चलते दिल्ली मेट्रो के करीब सोलह स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने पड़े हैं, जिससे आम नागरिकों को भी आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

Delhi Protest: जमीन पर बढ़ा टकराव और देशव्यापी असर

राजधानी तक सीमित रहने वाला यह आंदोलन अब देश के विभिन्न राज्यों में अपनी जड़ें फैला चुका है। पटना के जेपी गोलंबर के पास छात्रों और पुलिस के बीच तीखी झड़प की खबरें सामने आईं, जहां स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। हैदराबाद, मुंबई और प्रयागराज जैसे शहरों से भी प्रदर्शनकारियों के सड़कों पर उतरने की तस्वीरें आई हैं।

जंतर-मंतर पर बारिश के बीच भी प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा लगा हुआ है। हालांकि आयोजकों ने समर्थकों से अपील की है कि वे अब और अधिक मात्रा में भोजन सामग्री न भेजें ताकि बर्बादी से बचा जा सके। दूसरी ओर, इस मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर भी अदालत में सुनवाई जारी है। दिल्ली उच्च न्यायालय में सोनम वांगचुक के अनशन और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई तय की गई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद का कोई नया दौर शुरू होता है या गतिरोध और गहराता है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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